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श्रमणसंघीय सलाहकार श्री
रूपेंद्रमुनिजी म.सा., परम पूज्य प्रवर्तक श्री उमेशमुनिजी म.सा 'अणु'
के 1986 के यशस्वी चातुर्मास की एक महान उपलब्धि पूज्य नंद जैन समिति
को पुनर्गठित करके पूज्य श्री नंदाचार्य साहित्य समिति मेघनगर (म.प्र.)
के रूप में गठन किया गया।
पिछले बारह वर्षों से आपकी सेवा में पूज्य गुरुदेवों के कल्याणकारी
साहित्य को प्रकाशित कर रही है। समग्र भारत के अलावा विदेशों में भी
समिति के सदस्य इसका लाभ लेकर सहयोग प्रदान कर रहे हैं। जैन, जैनेतर
एवं अन्य धर्मावलंबी भी सदस्यता ग्रहण कर सद्साहित्य का रसास्वादन
कर अपने जीवन को सफल बना रहे हैं।
समिति के तीन उद्देश्यों के अंतर्गत पू. आचार्य श्री गुरुदेव श्री
उमेशमुनिजी म. 'अणु' की निश्रा में एक ग्रंथागार विभाग कायम करके एक
उपसमिति का गठन किया गया।
प्राचीन पांडुलिपियों, ग्रंथों के रखरखाव अध्ययन एवं शोध के लिए
बदनावर (म.प्र.) में पू. श्री नंदाचार्य साहित्य समिति ग्रंथागार एवं
शोध संस्थान विभाग की स्थापना की जा रही है। पू. श्री नंदाचार्य जैन
ग्रंथालय का निर्माण किया जा रहा है। हम निकट भविष्य में उत्सुक
विद्याभिलाषियों को अध्ययन शोध की सुविधा के साथ-साथ आवास एवं भोजन
की सुविधा भी उपलब्ध कराने के लिए कृत संकल्प हैं। इस प्रकार के शोध
संस्थान पूरे भारत में सिर्फ दो-तीन होकर हमारे क्षेत्र में पहला
होगा। इसकी सफलता आपश्री के स्नेह एवं सहयोग से ही संभव है।
समिति
के प्रमुख उद्देश्य -
1. जैनागमों आदि को हस्तलिखित पांडुलिपियों का संरक्षण, संकलन एवं
प्रकाशन
2. जैन धर्म संबंधी साहित्य का प्रकाशन।
3. स्वाध्याय मंडलों, ग्रंथालयों, वाचनालयों आदि की ग्राम/नगरों में
स्थापना तथा संचालन में सहयोग।
आइए आप हम सब कंधे से कंधा मिलाकर समिति के इस महायज्ञ में अपना
योगदान देकर धर्मध्यान में विशेष गतिशील हों।
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