अखिल भारतीय श्री धर्मदास स्थानकवासी जैन युवा संगठन

दिनांक 17 जून 2001 को लिमड़ी 'गुजरात' में इस धार्मिक संगठन की स्थापना हुई।

धार्मिक संगठन की आवश्यकता प्रत्येक समाज को होत‍ी है ताकि समाज सुचारू रूप से, तरीके से कार्य कर सके एवं सभी वर्गों का सहयोग व समर्थन होने पर शक्ति भी प्राप्त होती है। धार्मिक संगठन का महत्व तो बहुत है, किंतु इसका संचालन कठीन कार्य है। क्योंकि धार्मिक संगठनों से कोई आर्थिक या अन्य द्रव्यों का लाभ तो होता नहीं है।

फिर भी लिमडी नगर (गुजरात) के युवाओं ने हिम्मत करके इस संगठन को बनाने सक्रिय करने के लिए दिनांक 17 जून 2001 को शुरूआत की, जिसमें श्री महेंद्र कर्नावट ने देश के अनेक स्थानों पर संपर्क कर युवा वर्ग को एकत्रित किया।

इस अवसर पर पूज्य आचार्य प्रवर जिनशासन गौरव, श्रावण श्रेष्ठ, अध्यापयोगी पू. श्री उमेशमुनिजी 'अणु' को आशीर्वचन, युवा वर्ग को प्राप्त हुए पूज्यश्री‍ का संदेश 'ईटों का ढ़ेर, चूना, लकड़ी, रेत आदि पड़े हो, उससे कोई मकान नहीं बनता। परंतु जब ईटों को व्यवस्थित जमाकर, दीवारे बनाई जाती है, लकडि़यों को व्यवस्थित जोड़कर दरवाजे आदि बनाए जाते है, तब वे ढ़ेर मकान के रूप में बदल जाता है। फिर यह मकान गर्मी, वर्षों और ठंड में मानव की सुरक्षा करता है। वैसा ही कुछ संगठन के विषय में है। संगठित मनुष्य बहुत बड़े-बड़े कार्य साध लेते है।

धर्म की दृष्टि से किया गया 'संगठन' धर्म-आराधना के लिए है यह हमें भलीभाँति समझ लेना चाहिए। धर्म संगठन में धर्म के कार्यों के संपादन का ही महत्व है। हमारी ज्ञान-आराधना, दर्शन-आराधना और चरित्र-आराधना, ये प्रमुख धार्मिक कार्य है। मनुष्य संयोग अवस्था में है। इसलिए वह पारम्पारिक सहयोग के बिना कार्य नहीं कर सकता है। यही कारण है कि संगठन आवश्यक प्रतीत होता है।

वय के अनुसार भी संगठन आस्तित्व में आते रहे और लिंग के अनुसार भी। हमारे यहाँ श्रावक संघ और महिला मंडल ये लिंग की अपेक्षा से निर्मित संगठन है। इसी प्रकार युवा संघ और बाल मंडल ये वय की अपेक्षा से निर्मित संगठन है तथा लिंग की अपेक्षा से बहुमंडल और बालिका मंडल का भी आस्तित्व है। सभी संगठन एक-दूसरे के सहयोग बनते हुए जैन संघ के समस्त समुचित कार्यों को साधते हुए, अपने आत्मकल्याण के मार्ग पर गतिशील बने रहे, यही इन संघों का मंडलों का उद्देश्य है। ये सभी संगठन अपने प्रशस्त उद्देश्य की सिद्धि के लिए समर्पण भाव से श्रमरत रहे, यही मंगलमय सत्कामना है।'

इस धार्मिक युवा संगठन के प्रथम अध्यक्ष श्री शांतिलाल भंडारी, बदनावर चयनित हुए। उनका कार्यकाल दो वर्ष रहा। आपने दो वर्षीय कार्यकाल में धार्मिक शिविर, युवा सम्मेलन बामनिया में, तथा युवा संगठन का मुख्यत्र 'जिन शासन गौरव' मासिक प्रारंभ किया, युवा सदस्यों का नामांकित व संगठित किया।

द्वितीय राष्‍ट्रीय अध्यक्ष श्री महेंद्र कर्नावट, लिमड़ी (गुजरात) के चयनित हुए। दो वर्षींय कार्यकाल में पाठशालाओं का प्रारंभ, संचालन, प्रतिक्रमण कंठस्थ, शिविर, प्रतिक्रमण सार्थ प्रतियोगिता, जिन शासन गौरव मासिक का प्रकाशन कर खूब धर्म प्रभावना व प्रचार प्रसार किया, पूज्य आचार्य भंगवत श्री उमेशमुनिजी के आचार्य पदरोहण के बाद प्रथम ऐतिहासिक चार्तुमास संजेली (गुजरात) में आपका महत्वपूर्णे योगदान एवं शिविर, युवा सम्मेलन आदि उल्लेखनीय है।

तृतीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक संघवी, एडवोकेट, बदनावर का मनोनयन हुआ। आपके कार्यकाल में पूज्य आचार्य भगवंत के रजत जयंती वर्ष के कार्यक्रम में धर्म अन्य धर्मसाधनाएँ, प्रतिक्रमण कंठस्थ करने वालों को प्रशस्ति पत्र, बहुमान, 250 प्रश्नों का धोकड़ों का प्रश्नपत्रों के माध्यम से धर्म वृद्धि, बहुमान, पुरस्कार, कई नगरों के श्रावक संघों के पदाधिकारियों का संगठन स्तर से बहुमान, पाठशालाओं के लिए पाठ्‍यक्रम तथा जिन शासन गौरव मासिक के अंकों का नियमित प्रकाशन व 200 शहरों में प्रदाय नि:शुल्क। थांदला में युवा सम्मेलन एवं कॉन्फ्रेंस के कार्यों में सक्रिय भूमिका एवं उनकी गतिविधियों पर नजर।

चतुर्थ युवा अध्यक्ष श्री महेश डाकोलिया, बड़वाह के है वे ऊर्जावान होकर सक्रियता के संगठन को मजबूत व सक्रिय कर धर्म आराधनाएँ करवाने के लिए प्रयत्नशील है।

'युवा संगठित हो धर्म में संलग्न होकर व्यसन मुक्त होकर प्रतिक्रमण युक्त हो।'

प्रस्तुति- संकलित- अशोक संघवी, एडवोकेट, बदनावर फोन : 099819-77001
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