पूज्य श्री धर्मदासजी म. के विषय में ऐतिहासिक सामग्री...

पूज्य श्री धर्मदासजी महाराज के जीवन से संबंधित ऐतिहासिक सामग्री की प्राप्ति नहिवत्‌ ही है। उनके जीवन से संबंधित अंशमात्र उल्लेख यत्र-तत्र प्राप्त हो जाते हैं। उनके पूर्व जीवन के विषय में विशेष वर्णन प्राप्त नहीं होता है। उनके माता-पिता के नाम तक में मतभेद दिखाई देता है। पूज्य श्री के हस्त से लिखित कुछ भी सामग्री प्राप्त नहीं हुई और न कोई आप श्री की विशिष्ट रचना ही मिली। अस्तु, पूज्य श्री के जीवन से संबंधित जो भी यत्‌किंचित्‌ सामग्री प्राप्त है, यहाँ उसे व्यवस्थित रूप देने का प्रयत्न किया जा रहा है।

जन्म-स्थान-

पूज्य श्री धर्मदासजी महाराज का जन्म गुजरात में हुआ था। आपके जन्मस्थान के विषय में कुछ भी मतभेद नहीं है। आपका जन्म अहमदाबाद के समीपस्थ ग्राम सरखेज में हुआ था। उस ग्राम में पहले रंगाई का कार्य विशेष होता था। इसलिए रंगाई-छपाई का कार्य करने वाली जाति के वहाँ विशेष घर थे। वे भावसार जाति के कहलाते थे। सरखेज में भावसारों के सात सौ घर थे। उनमें से अधिकांश लोंकागच्छ के अनुयायी थे। उनमें कई तो धर्म की ढ आस्था वाले थे। उनमें अच्छे सम्पन्न घर भी थे। (10)

(10) अमदावाद थी मात्र चार कोश दूर सरखेज गाममां आपणा चरित्र नायक पांचमा सुधारक श्रीमान्‌ धर्मदासजी म. नो जन्म थयौ हतो.... सरखेज गाम मां रंगारी (भावसार) ना 700 घरो हता। जेओ लोंकागच्छीय धर्म ने अनुसरता- प्रभुवीर पट्टावली पृ. 214

'अमदावाद थी विहार करे, तिवारिं पहली मजले सरखेद गाम आवे। तिहां घणां टोला ना साध आवे। तिहां रंगेटीमां थानिक नो जोग मिले। तिहां घणा रगारा साधना भाविक हुता। ते सांहजे काम थकी पर वारी ने रात्रे वषांण सांभलवा आवे'- धर्मदास उत्पत्ति।
 

माता-पिता के नाम-

उनके माता-पिता के नाम के विषय में मतभेद है। यथा (1) जीवणलाल कालीदास, (11) (2) जीवणभाई, (12) (3) कालीदास (13) और (4) कान्हजी जीवणजी। 14 पहले और दूसरे मत में भेद नहीं है। तीसरा मत भ्रान्ति से उत्पन्न हुआ है। गुजरात में पुत्र का नाम पहले और पिता का नाम बाद में लिखने की पद्धति है, जब कि मालवा, मेवाड और मारवाड में इससे विपरीत पद्धति थी। अतः जीवणजीकालीदास नाम में 'कालीदास' को धर्मदासजी म. के पिता समझ लिया गया है। जो कि वास्तव में उनके दादा थे। चौथे मत में 'कान्हजी' नाम भी भ्रान्त है। संभव है, कि- यह पितामह के नाम के स्थान पर हो। अतः धर्मदासजी महाराज के पिता का नाम जीवणलाल, जीवणभाई या जीवणजी ही सिद्ध होता है।

माता के नाम में भी मतभेद है। यथा- (1) डाहीबाई, 15 (2) हीराबाई 16 और (3) जीवाबाई। ये तीनों नाम प्राचीन गुजरात में स्त्रियों के हो सकते थे। परन्तु 'जीवाबाई' नाम भ्रान्त लगता है, जो 'जीवणजी कालीदास' नाम से निःसृत हो सकता है। डाहीबाई और हीराबाई इन दो नामों में कोई एक नाम हो सकता है। परन्तु अधिक उचित 'डाहीबाई' नाम लगता है।*

पिता की सामाजिक स्थिति और व्यक्तित्व-

उस समय वस्त्र-उद्योग में छपाई और रंगाई करने वालों का विशिष्ट स्थान था। उस कला में दक्ष व्यक्ति भी विपुल मात्रा में धनार्जन कर सकता था। जीवणभाई भी सुखी और सम्पन्न गृहस्थ थे। 17

उनका उनके समाज में अच्छा सन्मान था। वे लोगों में मुखिया के रूप में प्रसिद्ध थे। 18 वे सहृदय और उदार व्यक्ति थे। वे जैन धर्म के अनुयायी थे। लोंकागच्छ पर उनका अनुराग था। साधुओं की सेवा करके समुचित धर्मज्ञान भी प्राप्त किया था। धर्म में उनकी गाढी प्रीति थी। 19 अपनी शक्त्यनुसार वे धर्म आराधना में भाग लेते थे।

पूज्य श्री धर्मदासजी महाराज का जन्म-
धर्मदासजी म. का जन्म जीवणभाई पटेल के यहां हुआ था। आपके जन्म-संवत्‌ के विषय में तीन और जन्मतिथि के विषय में दो मत प्राप्त हुए हैं- (1) संवत्‌ 1701 में 20, (2) 1702 माघशुक्ला त्रयोदशी 21 (3) विक्रम सं. 1703 22, और (4) 1701 चैत्रशुक्ला एकादशी अर्ध रात्रि में। 23 इनमें सही संवत्‌ और सही तिथि के निर्णय करने के कोई भी प्रामाणिक साधन नहीं है। परन्तु उनकी दीक्षा के समय की परिपक्व बुद्धि की स्थिति हुए, अनुमानतः सं. 1701 जन्म संवत्‌ उचित लगता है। परन्तु मालवा परम्परा का 'सं. 1702 में जन्म' मानने की ओर विशेष झुकाव है।

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