अणु का साहित्य
जैनत्व का अमृत

'जैनत्व का अमृत' प्रश्नोत्तर-शैली की लघु-पुस्तिका है। इसमें गुरुदेव श्री ने ई. सन्‌ 1991 के पेटलावद वर्षावास में वहाँ के नवयुवकों को लिखाए गए प्रश्नोत्तरों तथा सन्‌ 1995 के बडवाह चातुर्मास में पूछे गए प्रश्नोत्तरों का संकलन साध्वी श्री संयमप्रभाजी ने किया है। इसका प्रकाशन ई.सन्‌ 1996 में पू. श्री प्रवीणाजी म.सा. आदि ठाणा 4 के घोटी वर्षावास की स्मृति में तथा मालव-केसरी पू. श्री सौभाग्यमलजी म.सा. के जन्म-शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में परम गुरु भक्त श्रीमान पारसमलजी भंवरलालजी पीचा द्वारा किया गया।

गुरुदेव द्वारा लिखित प्रश्नोत्तर धर्म के क्षेत्र में प्रविष्ट होनेवाले साधकों के लिए हैं। जैनधर्म की सामान्य जानकारी इसमें है। तीर्थ, तीर्थंकर, नमस्कार- मंत्र, वंदना, श्रावकों के प्रकार, स्थानकवासी परंपरा, माला फेरने की विधि आदि महत्वपूर्ण बातें गुरुदेव ने समझायी हैं। जो गागर में सागर के समान है। इसका द्वितीय संस्करण नंदाचार्य साहित्य समिति द्वारा प्रकाशित हुआ है।