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पूज्य श्री धर्मदासजी महाराज
के जीवन से संबंधित ऐतिहासिक सामग्री की प्राप्ति नहिवत् ही है।
उनके जीवन से संबंधित अंशमात्र उल्लेख यत्र-तत्र प्राप्त हो जाते
हैं। उनके पूर्व जीवन के विषय में विशेष वर्णन प्राप्त नहीं होता
है। उनके...
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जो मुझे आपसे कहना है...सुज्ञ श्रद्धालु उपासक-जन!
एवं उपासिकावृन्द! जिनवर प्रभु तीर्थर देव के द्वारा स्थापित
चतुर्विधतीर्थ के हम सदस्य हैं। हम अंतिम तीर्थरदेव भगवान महावीर
देव के शासन के अनुयायी हैं। श्रमण भगवान...-
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जैनधर्म भारत-वर्ष का अति
प्राचीन धर्म है। इसमें कई परंपराएँ हैं और कई
सम्प्रदाय-उपसम्प्रदाय हैं। धर्म-विशाल वटवृक्ष के समान है। उसकी
सम्प्रदायें और परम्परायें ही उसे विशालता प्रदान करती है। जिस
सम्प्रदाय में अतीत .....
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